गाजर के लिए पहचाना जा रहा बॉर्डर पर बसा ये गांव …देखें वीडियो

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श्रीगंगानगर khabarthenews.com

श्रीगंगानगर में राजस्थान-पंजाब सीमा के नजदीक बसा साधुवाली गांव गाजर की वजह से पहचान बना रहा है। तकरीबन 7000 की आबादी वाले इस गांव के वाशिंदों का मुख्य रोजगार खेतीबाड़ी है और वे लंबे समय से इसी से जुड़े हुए हैं।

पिछले कुछ समय से यहां के किसानों ने परंपरागत खेती के साथ साथ गाजर के उत्पादन में दिलचस्पी दिखाई और देखते ही देखते ही सभी किसानों ने गाजर उत्पादन में अपना रुझान दिखाना शुरू किया। साधुवाली नाम के इस गांव को देश भर में गाजर की वजह से जाना जा रहा है।

गुणवत्ता होने की वजह से लोग यहां की गाजरों को मंडी में आते ही हाथो हाथ खरीद लेते हैं । किसानों द्वारा दिखाया गया रुझान काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। वहीं, किसानों की मांग पर अगर सरकार भी थोड़ा गौर करें तो किसानों को काफी राहत मिल सकती है।

यहां उत्पादन होने वाली गाजर अलग ही मिठास की मानी जा रही है। इसकी वजह से अब देश के कई हिस्सों में यहां से गाजरें जाने लगी है । इस बार भी गाजर उत्पादक किसानों के चेहरों पर खुशी देखी जा रही है। इस बार तकरीबन 7000 बीघा में गाजर की बंपर पैदावार हुई है।

इस गांव के गाजर की वजह से मशहूर होने का कारण एक और भी है और वह कारण है यहां के किसानों द्वारा तैयार की गई गाजर की वाशिंग मशीन। दरअसल जब किसानों ने यहां पर गाजर उत्पादन शुरू किया तो गाजर को धोकर पैक करने की समस्या आड़े आई।

ऐसे में किसानों ने ही अपना दिमाग चलाते हुए एक मशीन अविष्कार कर दिया। इस मशीन को एक इंजन के सहारे चला जा रहा है। मशीन से एक ही वक्त में कई किवंटल गाजर धोई जा रही है। जिससे गाजर धुलने के बाद चमक उठती है और हर एक को अपनी तरफ आकर्षित करती है।

गाजर उत्पादन के बाद किसानों के चेहरों पर खुशी तो है ही साथ ही सिस्टम से थोड़ी नाराजगी भी है। किसानों की माने तो वे उत्पादन के दम पर अपनी पहचान बना रहे है। लेकिन सरकार की तरफ से उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं दी जा रही।

किसानों द्वारा नहर के किनारे अस्थाई मंडी बनाई गई है, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है । उबड़ खाबड़ रास्ता और शाम होते ही अंधेरा हो जाना यहां परेशानी का सबब बना हुआ है । किसानों की मांग है कि यदि सरकार इस बारे में थोड़ा ध्यान दें तो उन्हें राहत मिल सकती है।

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