भारतीय संस्कृति में राष्ट्रवाद नहीं होता है बल्कि राष्ट्र भक्ति होती है: डॉ. पाण्डेय

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बीकानेर। ”राष्ट्रवाद पर एक परिचर्चा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन मुरलीसिंह यादव मेमोरियल प्रशिक्षण संस्थान, उदयरामसर परिसर में आयोजन किया गया।
इस अवसर पर अध्यक्षीय उदबोधन संगठन मंत्री अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रचारक डॉ. बालमुकुन्द ने राष्ट्रवाद की परिभाषा को पाश्चात्य संस्कृति का बताया। वास्तव में हमारी भारतीय संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति स्वयं एक राष्ट्र है। भारतीय संस्कृति में राष्ट्रवाद नहीं होता है बल्कि राष्ट्र एक भक्ति है। भारत का नागरिक है वह राष्ट्र का भक्ति सकता है और उन्होंने राष्ट्र भक्ति जबरदस्ती थोपने की बजाय उसके अंदर स्वयं से राष्ट्रभक्ति उत्पन्न करनी चाहिए।


साथ ही उन्होंने बताया कि जिस प्रकार एक शिशु का अपनी मां के साथ चित के साथ जुड़ाव होता है उसी प्रकार प्रत्येक नागरिक का भारत माता के प्रति भी जुड़ाव होना चाहिए। जैसे मां को संकट होता है तो निश्चित रूप से उसकी संतान को दु:ख होगा। वैसे ही प्रत्येक भारतीय को भारत माता पर आए संकट से हृदय में दु:ख होना चाहिए।
इस अवसर पर हिन्दू जागरण मंच, बीकानेर के प्रांत संयोजक जेठानन्द व्यास ने अपने उद्बोधन में छात्रों को यह बताया कि वर्तमान भारत में हमें राष्ट्रीयता की अच्छी स्थिति में है। एक लंबे समय बाद राष्ट्रवादी विचारधारा पुनर्जीवित हुई है। उन्होंने हाल ही में कश्मीर में धारा 370 हटाने का उदाहरण बताया। उन्होंने बताया कि यदि हम ऐसे ही हम या हमारी सरकारें राष्ट्रभक्ति निर्णय लेते रहेंगे तो निश्चित रूप से भारत का विश्वगुरू बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

संस्थान के प्रबंध निदेशक मनमोहनसिंह यादव ने अपने वक्तव्य में बताया कि राष्ट्रवाद केवल पढऩे या विचार करने का विषय नहीं है। राष्ट्रवाद एक जीवन शैली, जीवन पद्धति है। साथ ही उन्होंने बताया कि राष्ट्रवाद केवल सैद्धान्तिक नहीं है वरन् व्यक्ति के व्यवहार में होना चाहिए।

इस अवसर पर नगर विकास न्यास के पूर्व चेयरमैन महावीर रांका ने राष्ट्रभक्ति हमारे संस्कारों में होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति के द्वारा ईमानदारी व पूर्ण निष्ठा से किया गया कार्य भी एक राष्ट्रभक्ति है।
कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का स्वागत एवं परिचय संस्थान के निदेशक कुलदीप यादव ने किया। कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत सरस्वती वंदना करने के बाद स्वागत एवं मुख्य अतिथियों का माल्यपर्ण एवं शॉल, साफा एवं स्मृति चिन्ह देकर किया गया।  इस अवसर पर संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा कविता पाठ, भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया।

इस अवसर पर संस्थान के व्याख्याता श्रीमती प्रियंका यादव, श्रीमती संतोष गहलोत, श्रीमती शशिप्रभा यादव, श्रीमती गीता विश्नोई, श्रीमती मुन्नी सेवग, श्रीमती बिन्दु व्यास, संजय कुमार, श्रीमती ममता जोशी, श्रीमती शकुन्ताला बेनीवाल, डॉ. गौरव जोशी, इंजीनियर भवानीशंकर चौधरी, शिवशंकर रंगा, यशराज यादव, चन्द्रशेखर शर्मा, मदन सारड़ा, पूर्व पार्षद रमेश भाटी, मनोज पडि़हार एवं विद्यार्थियों की भी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का संस्थान के प्राचार्य डॉ. विनयकुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच का संचालन संस्थान के विद्यार्थी सीताराम उपाध्याय एवं भुवनेश जीनगर ने किया।

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