कांग्रेस : ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ से की तौबा!

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‘मेरा बूथ मेरा गौरव’

शेष बचे 20 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम नहीं करने की जानकारी

जयपुर। चुनावी साल में बूथ मैनेजमेंट को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में शुरू किए गए ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ कांग्रेस के लिए गले की फांस बन चुका है, जिसके चलते इन कार्यक्रमों से अब पार्टी ने तौबा कर ली है।

कार्यक्रमों में हंगामा और मारपीट की घटनाओं से वरिष्ठ नेता ही नहीं बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी काफी चिंतित हैं। नेताओं को डर है कि अगर आगे भी कार्यक्रमों को जारी रखा गया तो गुटबाजी और आपसी झगड़ों के चलते विधानसभा चुनाव में पार्टी को कहीं नुकसान नहीं उठाना पड़ जाए।

इसी के चलते अब पार्टी ने ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ कार्यक्रमों को विराम देने का मन बना लिया है। हालांकि इसके अभी आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुए हैं लेकिन राजनीतिक सूत्रों से इसी प्रकार की जानकारी सामने आई है।

झगड़ों की रिपोर्ट दिल्ली तलब

कार्यक्रमों में मारपीट और गुटबाजी की रिपोर्ट आलाकमान तक पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और सह प्रभारियों से रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही इन घटनाओं पर नाराजगी जाहिर की थी।

इसी को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पिछले महीने पीसीसी चीफ सचिन पायलट और प्रदेश प्रभारी को दिल्ली बुलवा कर अनुशासनहीनता बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि पार्टी अध्यक्ष के आदेश भी हवा-हवाई कर दिए गए।

180 विधानसभा क्षेत्रों में हुआ कार्यक्रम

जानकारी के मुताबिक मार्च से लेकर अभी तक 180 विधानसभा क्षेत्रों में ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ कार्यक्रमों का आयोजन हुआ है। जिसमें तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट-झगड़े के मामले सामने आए चुके हैं।

शाहपुरा के अलावा और किसी भी जगह पर अनुशासनहीनता बरतने और मारपीट करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

यह मानी जा रही है वजह

दरअसल, चुनाव में सिर्फ पांच महीनों का वक्त बाकि है। कांग्रेस में एक विधानसभा सीट पर आधा दर्जन से ज्यादा नेता टिकट के लिए दावेदारी जता रहे हैं। प्रदेश भर में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग गुट बन गए हैं। यही वजह है कि मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम में टिकटार्थियों में शक्ति प्रदर्शन की होड़ मची रही।

नेताओं के समर्थक कई बार आमने-सामने हो गए। नेता, कार्यकर्ताओं में ये कलह और नहीं बढ़ सके, इसलिए इस कार्यक्रम को विराम देने की बात सामने आ रही है।

 

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