बिहार की बिटिया का बीकानेर में कमाल!

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ये कहानी है बिहार की बिटिया सुरुचि की। इनकी माता बीकानेर के रेलवे हॉस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं। इसी वजह से पिता जितेंद्र भी आ गए और यहीं के हो गये। माता-पिता द्वारा बनाई अनुकूलता में सुरुचि की शिक्षा में चार चांद लग गये।

 

सुरुचि ने ग्यारह वीं से  ही सिंथेसिस में प्रवेश लिया और CBSE की  विषय चयन की छूट का लाभ ले हिंदी की जगह मैथ्स का चुनाव किया। बायोलॉजी सुरुचि ने लिया हुआ था ही।

सुरुचि की उम्र 17 वर्ष ही थी। बच्ची की योग्यता को देखते हुए संस्थान प्रबंधन ने सुझाव दिया कि इस पर बायोलॉजी का डबल प्रेशर नहीं रखें तो यह बारहवीं के साथ IIT में चयनित हो सकती है किंतु सुरुचि की माता ने अपने प्रोफेशन से लगाव के चलते तय कर रखा था कि बेटी को बनाना तो डॉक्टर ही है।

सुरुचि का बारहवीं के साथ

 ही NIT में सलेक्शन हो गया किंतु समय मां के सपने को पूरा करने का था। अतः टारगेट बैच में तैयारी प्रारंभ कर दी। उसकी प्रतिभा को देखते हुए संस्थान ने फिर सुझाव दिया गया कि वह पीएमटी के अलावा IIT का फॉर्म भी भरे। हालांकि यह सुझाव उसके परिजनों को थोड़ा अटपटा लगा किंतु सुरुचि और उसके परिजनों ने गुरुजनों के आदेश को मान लिया। परिश्रम का सुफल ये रहा कि सुरुचि बीकानेर की पहली ऐसी विधार्थी बनी जिसने एक ही वर्ष में AIPMT, RPMT, Bihar PMT, AFMC, Manipal PMT और IIT इन सभी को एक साथ क्वालीफाई कर लिया।

IIT में 2250 रैंक आने से थोड़ी दुविधा हुई कि प्रवेश IIT में ले या मेडिकल कालेज में। लेकिन सुरुचि के लिए ये अपने और अपनी मां के सपने को पूरा करने का अवसर था। उसने IIT के बजाय मेडिकल के प्रतिष्ठ नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग कालेज को चुना। यह कॉलेज भारत के टॉप 20 मेडिकल कालेजों में से एक है। यहाँ केवल लड़कियों को ही प्रवेश मिलता है।

सुरुचि और उसके परिजनों के सपने 

अब पूर्ण होते तब लग रहे हैं जब पीजी में उच्च रैंक प्राप्त कर वापस उसी कालेज में ही MS Surgery में प्रवेश मिल गया। इस उपलब्धि के लिए डॉ. सुरुचि कुमारी को बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

बजाज सिंथेसिस के निदेशक जेठमल सुतार कहते हैं कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, सही मार्गदर्शन के साथ मेहनत की जाए तो सफलता निश्चित है।

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