सराहनीय पहल : पेड़ बना वैवाहिक रीति का हिस्सा

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राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित बीकानेर जिले का रामनगर गांव आज अनूठी शादी से रूबरू होने जा रहा है। बेनीवाल परिवार में आयोजित इस विवाह में वैवाहिक संस्कारों को पेड़ से जोड़ा गया है। आज रातिजोगा के अवसर पर गांव की सभी महिलाओं को पारिवारिक वानिकी से जोड़ते हुए गुड़ की जगह अनार व निम्बू के दो-दो पौधे दिए गए साथ ही गांव के स्कूल में वर पक्ष द्वारा पौधरोपण किया गया।

इस अनूठी पहल की शुरुआत का श्रेय पारिवारिक वानिकी के प्रणेता व बीकानेर के डूंगर कॉलेज में समाजशास्त्र के एसोसिएट प्रोफ़ेसर श्यामसुंदर ज्याणी को जाता है जो करीब 15 वर्षों से पेड़ को परिवार का हिस्सा बनाने की मुहिम चला रहे हैं। इस मुहिम के तहत अब तक लाखों परिवारों को वे पारिवारिक वानिकी से जोड़ चुके हैं।

दूल्हे विजयपाल के पिता सांवताराम बेनीवाल ने बताया कि प्रीतिभोज में आने वाले सभी मेहमानों को भी हमारी तरफ से जामुन के फलदार पौधे भेंट किए जाएंगे।

पटाखों के पैसे से खरीदे पौधे

बेनीवाल ने बताया कि आमतौर पर शादी में 20-25 हजार रुपए पटाखों पर खर्च होते हैं जबकि पटाखे एक अनावश्यक बुराई से अधिक कुछ नहीं है, क्योंकि इससे वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण तो होता ही है निरीह पक्षी व पशु आतंकित और परेशान होते हैं, पैसे की बर्बादी तो ये है ही।

प्रोफेसर ज्याणी के आग्रह पर पटाखों को तिलांजलि देते हुए वर-पक्ष ने इसी पैसे से मेहमानोंं को उपहार स्वरूप देने के लिए फलदार पौधे खरीदे हैं। पटाखे तो कुछ मिनट का शौक है जबकि ये पेड़ और इनके बीजों से आगे उगने वाले पेड़ निरन्तर रूप से हजारों सालों तक पर्यावरण सन्तुलन और जीवों को भोजन व मनुष्यों को फल प्रदान करने का कार्य करेंगे।

भात में भी पौधे

दूल्हे के मामा दोलतराम डेलू ने बताया कि वे अन्य परम्परागत लेन-देन के साथ-साथ 300 निम्बू के पौधौं से भी भात भरेंगे। उन्होंने कहा कि किसान पेड़ का सच्चा मित्र है इसलिए हम किसानों पर पेड़ों को पनपाने की बड़ी जिम्मेदारी है, पेड़ को रीति-रिवाज का हिस्सा बनाकर हम इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकते हैं।

दुल्हन के सम्मान में होगा विशेष पौधरोपण

इतना ही नहीं बेनीवाल परिवार द्वारा वधू पक्ष के गांव सुरजनसर के सरकारी स्कूल में भी 101 पौधे लगाए जाएंगे जिनकी देखभाल वधू का परिवार करेगा। दूल्हे के पिता सांवताराम बेनीवाल द्वारा दुल्हन के घर मे खेजड़ी का पौधा लगाया जाएगा जिसे दुल्हन का परिवार बेटी की तरह पालेगा।

फेरों में शामिल होगा हरित वचन

फेरों के बाद सात वचनों की परम्परा को समृद्ध करते हुए दूल्हा-दुल्हन एक हरित वचन भी लेंगे जिसके तहत वे हर साल एक पेड़ लगाने और एक दम्पति को इस सम्बंध में प्रेरित करने का कार्य करेंगे।

कांकड़ पूजा के साथ मंदिर में रुद्राक्ष का वृक्ष लगाकर नवदम्पति का गृह प्रवेश होगा।

प्रो. ज्याणी ने इस पहल से जुड़ने के लिए बेनीवाल परिवार का आभार जताते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जरूरी है कि हम सब पेड़ को अपने परिवार का सदस्य समझकर उसे घर और अपने मन मे जगह दें। रेगिस्तानी दशाओं में पारिवारिक वानिकी के जरिए ही आसानी से पेड़ों को पनपाया जा सकता है। विवाह, जन्म-मृत्यु, त्योंहार ऐसे अवसर होते हैं जब हम सब आपस मे मिलते हैं इन अवसरों को पेड़ से जोड़कर परम्परा का हिस्सा बनाना वक्त की मांग है। बेनीवाल परिवार की यह पहल पूरे इलाके में अन्य परिवारों को भी इस हरित नवाचार से जुड़ने की प्रेरणा देगी।

इस अवसर पर दूल्हे विजयपाल बेनीवाल ने कहा कि युवा हमेशा ही बदलाव के वाहक रहे हैं मेरा यह प्रयास अन्य युवाओं को भी इस दिशा में आगे बढ़ने की चेतना देगा।

पाठ सौजन्य : सिद्धार्थ जोशी

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