शहर के विकास में बाधा, खुशियां क्या इसी में ही मिली

2619
eleveted road

बीकानेर। एलिवेटेड रोड निर्माण कार्य को हाइकोर्ट के सात दिनों तक कार्य रोकने के निर्देश पर शहर के व्यापारियों ने जो खुशी जताई, उसे देखकर ऐसा ही समझा जा सकता है कि शहर के विकास से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें सिर्फ अपने स्वार्थ से ही मतलब है। हालांकि किसी की रोजी-रोटी छिनने से किसी को खुशी नहीं होती है लेकिन बात जब देश या शहर के विकास की हो तो निज स्वार्थ दूर रखना होता है।

गौरतलब है कि एलिवेटेड रोड बन जाने से शहर के लाखों लोगों को रेलवे फाटक बंद होने की समस्या से निजात मिल जाएगी, लेकिन इस कार्य में दर्जनों दुकानदारों का व्यवसाय कुछ समय के लिए थम जाएगा। लाखों शहरवासियों की सुविधा के लिए दर्जनों व्यवसायी कुछ समय के लिए ये परेशानी झेल सकते हैं लेकिन चंद जिद्दी लोगों के अहम और राजनीतिक लोगों की महत्वकांक्षाओं के चलते शहरवासियों को उनकी सुविधा से महरूम किया जा रहा है।

इससे पहले भी शहर के बाजारों में दो ओवरब्रिज बन चुके हैं, वहां भी दुकानदार थे। कुछ वर्ष पहले रानीबाजार में पत्थर व्यवसायियों ने भी वॉशिंग लाइन के लिए रेलवे को जमीन छोड़ दी थी। क्या वे व्यवसायी नहीं थे? क्या उन्हें व्यवसाय में नुकसान नहीं झेलना पड़ा? अगर उन्होंने भी शहर के विकास को तरजीह दी थी तो महात्मा गांधी रोड के व्यवसायी भी तो इसी धरती के जाये-जन्मे हैं, उन्हें भी तो अपने शहर के लिए सोचना चाहिए।

देश भर में बायपास हल नहीं

आबादी के बीच से निकल रहे रेलवे फाटकों की समस्या का देश भर में बायपास बनाने का एक भी उदाहरण नहीं है। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर रेलवे के अधिकारी बताते हैं कि इस प्रकार की समस्या देश में बहुत से शहरों में सामने आई लेकिन वहां आरओबी, आरयूबी, एलिवेटेड रोड बनाकर ही समाधान किया गया। बीकानेर ही ऐसा शहर हैं जहां रेलवे फाटक की समस्या का समाधान बायपास निर्माण बताया जा रहा है। गौरतलब है कि जयपुर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, दिल्ली, मुरादाबाद सहित देश में पचासों ऐसे शहर हैं जहां रेलवे फाटकों की समस्या के निदान के लिए बायपास नहीं बनाया गया बल्कि दूसरे अन्य उपायों को अपनाया गया है।

निकल सकता है बीच का रास्ता

एलीवेटेड रोड निर्माण के लिए बीच का रास्ता भी निकला जा सकता है। जानकार लोगों के अनुसार जिस प्रकार चौंखूटी रोड पर ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया है, उसी प्रकार महात्मा गांधी रोड पर भी एलिवेटेड रोड बन सकती है। यानि, जितनी जगह है उसी पर एलिवेटेड रोड बनवाई जाए। ऐसा करने से न तो दुकानों को तोड़ना पड़ेगा और न ही किसी व्यवसायी को परेशानी झेलनी होगी। सही मायनों में कहा जाए तो कुछ व्यवसायी और उनके पीछे खड़े राजनीतिक दलों के लोग अपने स्वार्थवश इस समस्या का निपटारा होने ही नहीं देना चाहते हैं।

–कमलकांत शर्मा, विधिक पत्रकार

अपना उत्तर दर्ज करें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.