भारत के मंदिरों में भारत के दलित राष्ट्रपति की बेकद्री : मंदिर प्रबंधन को नोटिस

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राष्ट्रपति को पुरी जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में जाने से रोकने के मामले में प्रबंधन को नोटिस

इस साल मार्च में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी के साथ ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर गए थे. आरोप है कि गर्भगृह के रास्ते पर कुछ सेवादारों ने उनका रास्ता रोका था और कुछ ने उनकी पत्नी के साथ धक्का-मुक्की भी की थी.

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद के साथ ओडिशा के पुरी शहर में स्थित जगन्‍नाथ मंदिर में बदसलूकी का मामला सामने आया है. 18 मार्च, 2018 को राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ मंदिर में दर्शन करने गए थे, जहां मंदिर के कुछ सेवादारों द्वारा कथित तौर पर उनके साथ बदसलूकी की गई.

दोनों लोगों को मंदिर के गर्भ गृह में जाने से रोकने का प्रयास किया गया. राष्ट्रपति भवन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मंदिर प्रबंधन को नोटिस जारी किया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति भवन से प्रकरण पर आपत्ति जताने के बाद मंदिर प्रशासन ने सेवादारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) द्वारा 20 मार्च की बैठक की रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवादारों के एक समूह ने मंदिर के गर्भगृह के पास राष्ट्रपति के मार्ग को अवरूद्ध कर दिया गया था और उनकी पत्नी के साथ धक्का-मुक्की की गई थी.

19 मार्च को राष्ट्रपति भवन ने सेवादारों की हरकत पर आपत्ति जताते हुए पुरी के ज़िला अधिकारी अरविंद अग्रवाल को पत्र भेजा था. एसजेटीए की मीटिंग की रिपोर्ट को टाइम्स ऑफ इंडिया ने मंगलवार 26 जून को देखा, जिसके बाद पूरा प्रकरण सामने आया.

एसजेटीए के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप्त कुमार मोहपात्रा ने इस बात को स्वीकार किया कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ मंदिर में दिक्कत हुई थी, लेकिन उससे अतिरिक्त उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘हमने इस मामले को मंदिर के प्रबंधक समिति के बैठक के दौरान चर्चा की थी. मामले की जांच की जा रही है.’

राज्यसभा सांसद बीजेडी प्रवक्ता प्रताप केशरी देब ने कहा कि कलेक्टर ने जांच शुरू कर दिया है. मंदिर प्रशासन भी इस मामले की जांच कर रहा है. बहुत बार कोशिश करने के बाद भी उनकी ज़िलाधिकारी से बात नहीं हो पाई.

दरअसल 18 मार्च को सुबह 6:35 बजे से लेकर 8:40 तक सामान्य लोगों के लिए दर्शन रोक दिया गया था, ताकि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी दर्शन कर सकें. कुछ सेवादारों के अलावा कुछ अफसरों को ही मंदिर में राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ जाने की अनुमति थी.

राष्ट्रपति ने मंदिर के गर्भगृह के पास पहुंचे तो कुछ सेवादारों ने उनके और उनकी पत्नी के साथ धक्का-मुक्की की थी और रास्ता रोकने का प्रयास किया था.

राजस्थान के पुष्कर मंदिर में भी हो चुका है विवाद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बीते 15 मई को राजस्थान के पुष्कर में स्थित ब्रह्मा मंदिर गए थे. सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ाई गई थी कि राष्ट्रपति को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया था, जिसके चलते उन्होंने मंदिर की सीढ़ियों पर पूजा की थी.

मालूम हो कि रामनाथ कोविंद दलित समाज से हैं और भारत में कई मंदिरों में आज भी दलितों का प्रवेश वर्जित है.

हालांकि इस मामले में ज़िला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की पत्नी को मंदिर की सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत होने की वजह बाहर पूजा की गई थी.

जातीय भेदभाव के चलते मंदिर में प्रवेश न देने का मामला गलत साबित हुआ था क्योंकि राष्ट्रपति की बेटी मंदिर के अंदर दर्शन करने गई थीं.

मंदिर के पुजारी ने जातीय भेदभाव का आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि जब उन्हें पता चला कि राष्ट्रपति आ रहे हैं तब उन्होंने मंदिर के गर्भ गृह में पूजा की व्यवस्था की थी, लेकिन राष्ट्रपति की पत्नी को सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत थी, इसलिए बाहर व्यवस्था कराई गई थी.

साभार : द वायर हिंदी

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